Home / Blogs / पेसमेकर क्या होता है? जानिए पेसमेकर की ज़रूरत कब पड़ती है (What is Pacemaker in Hindi)

पेसमेकर क्या होता है? जानिए पेसमेकर की ज़रूरत कब पड़ती है (What is Pacemaker in Hindi)

September 24, 2026
5 min read

पेसमेकर (Pacemaker), ये नाम सुनते ही ज़्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल कौंधता है: “क्या अब बड़ी सर्जरी करानी पड़ेगी?” सच्चाई इससे ज़्यादा सीधी और राहत भरी है। पेसमेकर के लिए बड़ी ओपन-हार्ट सर्जरी की ज़रूरत नहीं पड़ती, बल्कि बिना सीना खोले, स्थानीय एनेस्थीसिया के तहत एक छोटी प्रक्रिया से इसे लगा दिया जाता है |

यह दिल की बिगड़ी हुई लय को फिर से व्यवस्थित करने का एक भरोसेमंद तरीका है, ठीक वैसे ही जैसे घर की बिजली अचानक चली जाए तो इन्वर्टर चुपचाप काम संभाल लेता है, बिना किसी हलचल के।

इस ब्लॉग में हम समझेंगे कि पेसमेकर असल में है क्या, यह किस तरह काम करता है, इसके प्रकार, पेसमेकर की ज़रूरत कब पड़ती है और इसे कैसे लगाया जाता है, ताकि अगर यह सलाह आपको या आपके किसी अपने को मिली हो, तो डर की जगह सही जानकारी हो।

Request a Consultation

पेसमेकर क्या है? (What is Heart Pacemaker?)

पेसमेकर एक छोटा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो दिल की धड़कन को सामान्य और स्थिर लय में बनाए रखने में मदद करता है। दिल में चार कक्ष (chambers) होते हैं, ऊपर के दो अलिंद (atria) और नीचे के दो निलय (ventricles), और इन्हीं के बीच तालमेल से खून सही दिशा में पंप होता है।

इस सिस्टम के अंदर एक प्राकृतिक “विद्युत जनरेटर” होता है जिसे SA नोड (SA node) कहते हैं: यह हर धड़कन के लिए सिग्नल भेजता है। जब यह सिग्नल कमज़ोर पड़ जाता है, तो दिल की धड़कन धीमी, अनियमित या अस्थिर हो जाती है। इसलिए इसे SA Pacemaker कहा जाता है

पेसमेकर इसी सिग्नल की कमी को पूरा करता है और ज़रूरत पड़ने पर हल्के विद्युत आवेग भेजकर दिल को सही समय पर धड़कने के लिए संकेत देता है।

पेसमेकर के दो मुख्य हिस्से होते हैं:
  • जनरेटर (generator): एक छोटा-सा बॉक्स, जिसमें बैटरी और सर्किट होता है, यही असली सिग्नल भेजता है
  • तार (leads): पतली, लचीली डोरियाँ जो जनरेटर को दिल से जोड़ती हैं

About Pacemaker in hindi, Cardiac pacemaker, heart pacemaker parts showing the generator and leads connected to the heart, with Hindi labels explaining their functions.

पेसमेकर के प्रकार (Types of cardiac pacemaker in hindi)
  • सिंगल-चैंबर पेसमेकर: दिल के एक कक्ष (आमतौर पर वेंट्रिकल (ventricle)) को सिग्नल देता है
  • डुअल-चैंबर पेसमेकर: दिल के दो कक्षों के बीच तालमेल बनाए रखता है
  • लीडलेस पेसमेकर बिना तारों (leads) के, सीधे दिल में लगाया जाने वाला अत्याधुनिक उपकरण; चीरे और टांकों की ज़रूरत नहीं

हर मरीज़ के लिए सही प्रकार का चुनाव उसकी हृदय स्थिति, उम्र और जीवनशैली पर निर्भर करता है। यही वजह है कि यह फैसला हमेशा विस्तृत जांच के बाद ही लिया जाना चाहिए।

पेसमेकर की ज़रूरत कब पड़ती है? (Pacemaker kab lagaya jata hai)

पेसमेकर की सलाह आमतौर पर तब दी जाती है जब दिल की प्राकृतिक विद्युत प्रणाली ठीक से काम नहीं कर रही हो। इसमें शामिल हैं:

  • ब्रैडीकार्डिया: दिल की धड़कन असामान्य रूप से धीमी होना
  • हार्ट ब्लॉक: दिल के ऊपरी और निचले कक्षों के बीच सिग्नल का ठीक से न पहुँचना
  • बार-बार चक्कर आना, बेहोशी या थकान (वजह धीमी धड़कन हो सकती है)
  • हृदय सर्जरी (जैसे बायपास या वाल्व रिप्लेसमेंट) के बाद दिल की लय को सहारा देने की ज़रूरत पड़ना
  • जन्मजात हृदय दोष (congenital heart defects) से जुड़ी कुछ स्थितियाँ, खासकर बच्चों में (know more: Pacemaker implantation in children)

“पेसमेकर लगवाने का फैसला डरावना नहीं, बल्कि एक सुरक्षा कदम है। सही समय पर लिया गया यह निर्णय मरीज़ को बेहोशी, थकान और गंभीर जोखिमों से बचाकर सामान्य, सक्रिय जीवन जीने में मदद करता है,” कहते हैं डॉ. दिनेश कुमार मित्तल, सीनियर डायरेक्टर एवं हेड ऑफ डिपार्टमेंट, कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी, फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग, जिन्हें इस क्षेत्र में 25+ वर्षों का अनुभव और 10,000 से अधिक सफल कार्डियक सर्जरी करने का अनुभव है।

पेसमेकर कैसे लगाया जाता है? (Pacemaker kaise lagaya jata hai)

Pacemaker surgery एक छोटी, मिनिमली इनवेसिव (minimally invasive) प्रक्रिया है, जिसमें बड़े ऑपरेशन की जगह सिर्फ एक छोटा चीरा और स्थानीय एनेस्थीसिया शामिल होता है। पूरी प्रक्रिया कैथ लैब में पाँच चरणों में पूरी होती है:

तैयारी
  • प्रक्रिया से पहले ब्लड टेस्ट, ECG और चेस्ट X-ray किए जाते हैं।
  • मरीज़ को 6-8 घंटे कुछ न खाने की सलाह दी जाती है
  • दवा देने के लिए हाथ में एक IV लाइन लगाई जाती है।
एनेस्थीसिया
  • सिर्फ चीरे वाली जगह को स्थानीय एनेस्थीसिया (Local Anesthesia) से सुन्न किया जाता है।
  • मरीज़ होश में रहता है लेकिन कुछ महसूस नहीं होता।
चीरा और तार डालना
  • कॉलरबोन के नीचे, आमतौर पर बाईं तरफ, लगभग 2 इंच का चीरा लगाया जाता है
  • चीरे के पास मौजूद एक नस (subclavian vein) में एक छोटी सुई से रास्ता बनाया जाता है
  • इसी रास्ते से तार को धीरे-धीरे नस के अंदर, दिल तक भेजा जाता हैt
  • डॉक्टर पूरे सफर को लाइव X-ray (fluoroscopy) पर देखते रहते हैं, ताकि तार दिल की सही जगह पर पहुँच सके
टेस्टिंग और फिक्सिंग
  • तार को दिल की दीवार में फिट करने के बाद डॉक्टर सिग्नल की सही स्ट्रेंथ चेक करते हैं।
  • इसके बाद पेसमेकर डिवाइस को कॉलरबोन के नीचे त्वचा में बनाई गई एक छोटी “पॉकेट” में रखकर तार से जोड़ दिया जाता है, और चीरे को टांके लगाकर बंद कर दिया जाता है।
निगरानी

Pacemaker surgery showing five steps: preparation, local anesthesia, incision and lead placement, testing and fixation, and monitoring, with a leadless pacemaker illustration. cardiac pacemaker/ heart pacemaker, pacemaker kaise lagaya jata hai

पूरी प्रक्रिया में 1 से 2 घंटे लगते हैं। इसके बाद चेस्ट X-ray और ECG से डिवाइस की सही पोज़िशन कन्फर्म की जाती है, और ज़्यादातर मरीज़ 24-48 घंटों में घर लौट सकते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि पेसमेकर तकनीक भी लगातार आगे बढ़ रही है। अब लीडलेस पेसमेकर भी आने लग गए हैं, जिनमें कोई तार (leads) या चीरे की ज़रूरत नहीं पड़ती, डिवाइस को सीधे कैथेटर के ज़रिए दिल के अंदर पहुँचा दिया जाता है। हाल ही में दिल्ली के एक अस्पताल में भारत का पहला डुअल-चैंबर लीडलेस पेसमेकर (AVEIR DR) एक 83 वर्षीय मरीज़ में सफलतापूर्वक लगाया गया, जो पहले सिर्फ एक कक्ष तक सीमित तकनीक से आगे की एक बड़ी उपलब्धि है।

पेसमेकर लगने के बाद रिकवरी टिप्स

  • इम्प्लांट वाली तरफ का हाथ कंधे से ऊपर न उठाएं, कम से कम 1-2 हफ्ते तक
  • घाव को सूखा और साफ रखें, नहाते समय सीधा पानी न लगने दें
  • 4-6 हफ्ते तक भारी सामान उठाने या ज़ोरदार एक्सरसाइज़ से बचें, ताकि तार अपनी जगह पर सेट हो सकें
  • हल्की सैर पहले हफ्ते से ही शुरू की जा सकती है

पेसमेकर लगने के बाद डॉक्टर से कब मिलें?

अगर इम्प्लांट के बाद सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, चीरे वाली जगह पर सूजन, या लगातार चक्कर आना महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, ये संकेत डिवाइस या इन्फेक्शन से जुड़ी किसी समस्या के हो सकते हैं। ध्यान रखने योग्य संकेत:

  • सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द
  • इम्प्लांट वाली जगह पर सूजन, लालिमा या दर्द
  • लगातार चक्कर आना या बेहोशी जैसा महसूस होना
  • अनियमित या तेज़ धड़कन

एक बार पेसमेकर सही तरीके से काम करना शुरू कर देता है, तो ज़्यादातर मरीज़ों की ज़िंदगी उतनी ही सामान्य हो जाती है जितनी पहले थी, बस अब दिल पर उतना दबाव नहीं रहता।

पेसमेकर से जुड़े कुछ मिथक

पेसमेकर से कई मिथक जुड़े हुए हैं। तो चलिए कुछ आम मिथकों को तथ्यों से अलग करते हैं:

  • मिथक: पेसमेकर लगने के बाद MRI नहीं करवा सकते।

सच्चाई: ज़्यादातर आधुनिक पेसमेकर MRI-कम्पैटिबल होते हैं, डॉक्टर से पुष्टि ज़रूरी है

मिथक: पेसमेकर के बाद फ्लाइट में सफर नहीं कर सकते।

सच्चाई: हवाई यात्रा पूरी तरह सुरक्षित है। एयरपोर्ट का मेटल डिटेक्टर पेसमेकर को कोई नुकसान नहीं पहुँचाता, अगर बीप हो भी जाए तो सिर्फ पेसमेकर कार्ड दिखाकर आगे बढ़ा जा सकता है, हैंड-चेकिंग की ज़रूरत पड़ सकती है।

  • मिथक: मोबाइल फोन से खतरा होता है।

सच्चाई: सामान्य इस्तेमाल में कोई जोखिम नहीं, बस फोन को पेसमेकर के ठीक ऊपर लंबे समय तक न रखें

निष्कर्ष

पेसमेकर न बड़ी सर्जरी है, न किसी गंभीर बीमारी का संकेत, बल्कि दिल की लय को फिर से व्यवस्थित करने का एक सुरक्षित, भरोसेमंद तरीका है। सही समय पर लिया गया यह फैसला मरीज़ को बेहोशी और थकान जैसी परेशानियों से बचाकर एक सामान्य, सक्रिय जीवन जीने का मौका देता है। इस बारे में सही सलाह के लिए डॉ. दिनेश कुमार मित्तल से संपर्क करें।

FAQs

पेसमेकर लगने के बाद पूरी तरह ठीक होने में कितना समय लगता है? expand_more

शुरुआती घाव 1-2 हफ्ते में भर जाता है, पहला फॉलो-अप भी इसी दौरान होता है। भारी काम और ज़ोरदार एक्सरसाइज़ से 4-6 हफ्ते तक बचना चाहिए, जब तक तार अपनी जगह पर पूरी तरह सेट न हो जाएं। इसके बाद ज़्यादातर मरीज़ पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं।

पेसमेकर की बैटरी कितने साल तक चलती है? expand_more

ज़्यादातर पेसमेकर की बैटरी 8 से 12 साल तक चलती है, इसके बाद डिवाइस को बदलने की ज़रूरत होती है।

क्या पेसमेकर लगवाने में दर्द होता है? expand_more

प्रक्रिया के दौरान स्थानीय एनेस्थीसिया दिया जाता है, इसलिए दर्द नहीं होता; इम्प्लांट के बाद हल्की सूजन कुछ दिनों तक रह सकती है।

दिल्ली में पेसमेकर के लिए सबसे अच्छे डॉक्टर कौन हैं? expand_more

डॉ. दिनेश कुमार मित्तल, फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाग में सीनियर डायरेक्टर एवं हेड ऑफ डिपार्टमेंट (कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी), 25+ वर्षों के अनुभव और 10,000+ सफल सर्जरी के साथ, दिल्ली-एनसीआर के अग्रणी कार्डियक विशेषज्ञों में गिने जाते हैं: बच्चों से लेकर वयस्कों तक हर उम्र के मरीज़ों के लिए।

डॉ. दिनेश कुमार मित्तल से परामर्श कैसे बुक करें? expand_more

आप सीधे फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग की वेबसाइट के ज़रिए या क्लिनिक में कॉल करके अपॉइंटमेंट बुक कर सकते हैं।

Dr. Dinesh Kumar Mittal's Content Team

Dr. Dinesh Kumar Mittal's Content Team

Dr. Dinesh Kumar Mittal's medical content team specialises in creating accurate, clear, and patient-focused healthcare content. With strong clinical understanding and expertise in technical writing and SEO, the team translates complex medical information into reliable, accessible resources that support informed decisions and uphold Dr. Mittal's commitment to quality care.

This content is reviewed by Dr. Dinesh Kumar Mittal

You Might Also Like

बाईपास सर्जरी के बाद क्या खाएं? डाइट और सावधानियां

बाईपास सर्जरी के बाद क्या खाएं – यह सवाल हर मरीज़ और उनके परिवार के…

Pacemaker Surgery Cost In Delhi | Dr. Dinesh Kumar Mittal – Dr. Dinesh Mittal

  A normal, healthy heart has internal pacemakers that regulate its rhythmic contractions. Pacemakers play…

What Are the Various Treatment Options Available for VSD? – Dr. Dinesh Mittal

  Ventricular Septal Defects (VSDs) are common heart problems since birth, causing a hole in…

Is Adult VSD Closure a Viable Solution for Heart Problems? – Dr. Dinesh Mittal

  Ventricular Septal Defects (VSDs) are common heart issues in adults, involving abnormal openings between…

WhatsApp logo WhatsApp